मार्जिन और मार्कअप के फ़ॉर्मूले
मुनाफ़ा = बिक्री मूल्य − लागत
ग्रॉस मार्जिन = मुनाफ़ा ÷ बिक्री मूल्य × 100
मार्कअप = मुनाफ़ा ÷ लागत × 100
तय मार्जिन के लिए कीमत = लागत ÷ (1 − मार्जिन ÷ 100)
मार्जिन और मार्कअप एक जैसे नहीं हैं
मार्जिन मुनाफ़े की तुलना बिक्री मूल्य से करता है, जबकि मार्कअप लागत से। ₹400 में खरीदकर ₹600 में बेचने पर मुनाफ़ा ₹200 है। यह 33.3% मार्जिन है लेकिन 50% मार्कअप। छोटे दुकानदार अक्सर लागत पर 30% जोड़कर सोचते हैं कि उन्हें 30% मार्जिन मिल रहा है, जबकि असल में मार्जिन सिर्फ़ 23% होता है।
उदाहरण: 35% मार्जिन के लिए कीमत
एक ऑनलाइन विक्रेता को एक प्रोडक्ट ₹400 में पड़ता है और वह 35% मार्जिन चाहता है। कीमत = 400 ÷ (1 − 0.35) = ₹615.38। मुनाफ़ा ₹215.38 है और इसके लिए 53.8% मार्कअप चाहिए।
मार्जिन से मार्कअप की तालिका
| चाहा गया मार्जिन | ज़रूरी मार्कअप |
|---|---|
| 10% | 11.1% |
| 20% | 25% |
| 25% | 33.3% |
| 30% | 42.9% |
| 40% | 66.7% |
| 50% | 100% |
लागत में क्या-क्या जोड़ें
ऑनलाइन बेचने वालों को लागत में सिर्फ़ ख़रीद मूल्य नहीं, बल्कि पैकिंग, शिपिंग, मार्केटप्लेस कमीशन और पेमेंट गेटवे फ़ीस भी जोड़नी चाहिए। अगर आप GST रजिस्टर्ड हैं, तो लागत और बिक्री मूल्य दोनों GST के बिना डालें, क्योंकि ख़रीद पर लगा GST आपको इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में वापस मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अच्छा प्रॉफ़िट मार्जिन कितना होता है?
यह उद्योग पर निर्भर है। किराना में नेट मार्जिन अक्सर 2 से 5% होता है, जबकि कपड़ों और सॉफ़्टवेयर में ग्रॉस मार्जिन काफ़ी ज़्यादा होता है।
मार्कअप को मार्जिन में कैसे बदलें?
मार्जिन = मार्कअप ÷ (100 + मार्कअप) × 100। 50% मार्कअप = 33.3% मार्जिन।
क्या मार्जिन 100% से ज़्यादा हो सकता है?
नहीं। मार्जिन बिक्री मूल्य का हिस्सा है, इसलिए 100% से ज़्यादा नहीं हो सकता। मार्कअप कितना भी हो सकता है।
ग्रॉस मार्जिन और नेट मार्जिन में क्या अंतर है?
ग्रॉस मार्जिन सिर्फ़ प्रोडक्ट की सीधी लागत घटाता है। नेट मार्जिन में किराया, वेतन और टैक्स भी घटते हैं।
क्या शिपिंग को लागत में जोड़ना चाहिए?
हां, अगर हर ऑर्डर पर शिपिंग का खर्च आप उठाते हैं।
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